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यह कैसे संभव हुआ कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक ही रात में यरुशलम गए, फिर आसमानों की सैर की और उसी रात वापस भी आ गए?

मानव प्रौद्योगिकी ने एक ही क्षण में दुनिया के सभी हिस्सों में मानव आवाज और छवियों को पहुँचा दिया, तो क्या 1400 साल से अधिक पहले मानव जाति के सृष्टिकर्ता के लिए आत्मा और शरीर के साथ अपने पैगंबर को आसमान तक ले जाना संभव नहीं है? नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने जिस जानवर की सवारी की थी, उसका नाम बुराक़ है। बुराक़ एक लंबे और सफ़ेद जानवर का नाम है, जो गधे से बड़ा एवं खच्चर से छोटा होता है। जो (इतनी तेज़ छलांग लगाता है कि) अपनी दृष्टि की सीमा पर क़दम रखता है। उसकी एक लगाम एवं एक ज़ीन (काठी) होती है। अंबिया -उन सब पर अल्लाह की शांति हो- उसकी सवारी करते हैं। (यह बुख़ारी एवं मुस्लिम का वर्णन है)

''इसरा एवं मेराज'' का सफर अल्लाह की सम्पूर्ण क्षमता एवं उसके इरादे से हुआ है, जो हमारी सोच से ऊपर एवं हमारी जानकारी के सभी क़ानूनों से भिन्न है। यह सारे संसारों के रब की क़ुदरत के प्रमाणों एवं निशानियों में से एक है, क्योंकि उसी ने इन कानूनों को बनाया है।

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