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[सूरा अल-बक़रा : 136]

जहाँ तक फ़रिश्तों की बात है, तो यह अल्लाह की सृष्टियों में से एक महान सृष्टि हैं, जो नूर से पैदा किए गए हैं। उन्हें अच्छा करने के लिए बनाया गया है। वे अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं। अल्लाह की पाकी बयान करते हैं। इबादत करते हैं। न थकते हैं और न आलस्य करते हैं।

''वे रात और दिन उसकी पवित्रता का गान करते हैं तथा आलसस्य नहीं करते।" [76] "वे अवज्ञा नहीं करते अल्लाह के आदेश की तथा वही करते हैं, जिसका आदेश उन्हें दिया जाए।" [77]

[अल-अंबिया : 20] उनपर ईमान मुसलमानों, यहूदियों एवं ईसाइयों के बीच एक साझे की चीज़ है। उनमें से एक फ़रिश्ते का नाम जिबरील -अलैहिस्सलाम- है, जिन्हें अल्लाह ने अपने एवं अपने रसूलों के बीच मध्यस्थ बनाया है। वह उनके पास वह्य (प्रकाशना) लेकर आते थे। एक और फ़रिश्ता मिकाईल -अलैहिस्सलाम- हैं। उनका काम बारिश बरसाना एवं पौधे उगाना है। एक और फ़रिश्ता इसराफील -अलैहिस्सलाम- हैं।। उनकी ज़िम्मेदारी क़यामत के दिन सूर फूंकना है। इस तरह के और भी फ़रिश्ते हैं।

[सूरा अत-तहरीम : 6]

जहाँ तक जिन्नात की बात है, तो वह एक गैबी दुनिया के प्राणी हैं। जिन्नात इस धरती में हमारे साथ रहते हैं। उन्हें इंसान की तरह अल्लाह के अज्ञापालन का आदेश दिया गया है और उसकी अवज्ञा से मना किया है। परन्तु हम उन्हें देख नहीं सकते। वे आग से पैदा किए गए हैं, जबकि इंसान मिट्टी से पैदा किया गया है। अल्लाह ने बहुत सारे क़िस्से बयान किये हैं, जो जिन्नात की शक्ति एवं उनकी क्षमता को स्पष्ट करते हैं। भौतिक हस्तक्षेप के बिना दिलों में भ्रम पैदा करने या बात डालने की क्षमता उनके पास है। परन्तु वे परोक्ष का ज्ञान नहीं रखते और मज़बूत ईमान वाले मोमिन को कष्ट नहीं दे सकते।

''और शैतान अपने दोस्तों के दिलों मे बात डालते हैं, ताकि वे आपसे लड़ सकें।'' [78] शैतान : शैतान हर विद्रोही का नाम है। चाहे वह इंसानों में से हो या जिन्नों में से।

[सूरा अल-अनआम : 121]

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